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Jabalpur: बरगी क्रूज हादसे पर हाईकोर्ट सख्त, तीनों जनहित याचिकाओं का निराकरण; दिए खास निर्देश

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Tue, 12 May 2026 09:19 PM IST
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सार

बरगी क्रूज हादसे में 13 मौतों को लेकर दायर तीन जनहित याचिकाओं का हाईकोर्ट ने निराकरण कर दिया। अदालत ने कहा कि सभी मुद्दे न्यायिक जांच आयोग के समक्ष रखे जाएं। साथ ही, यात्रियों को बचाने वाले मजदूरों को सम्मानित करने की बात कही।

Negligence in Bargi cruise accident placed before judicial commission
जबलपुर हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

जबलपुर। बरगी क्रूज हादसे में कथित लापरवाही के चलते 13 यात्रियों की मौत के मामले में दायर तीन जनहित याचिकाओं पर मंगलवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने घटना को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होनी चाहिए। अदालत ने तीनों याचिकाओं का निराकरण करते हुए याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे अपने सभी मुद्दे जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग के समक्ष प्रस्तुत करें।

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नानाजी देशमुख विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. जी.पी. मिश्रा सहित दो अन्य लोगों की ओर से दायर याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि पर्यटन विभाग ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर पर्यटकों की जान जोखिम में डाली। याचिका में कहा गया कि यदि सुरक्षा नियमों का पालन किया जाता तो यह हादसा टाला जा सकता था।

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याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि क्रूज में लाइफ जैकेट अलमारी में बंद रखी गई थीं और हादसे के समय क्रूज डूबने लगा तब यात्रियों को जैकेट बांटी गई। बच्चों के लिए पर्याप्त जैकेट उपलब्ध नहीं थीं और जो जैकेट थीं, उनकी गुणवत्ता भी खराब थी। यहां तक कि लाइफ जैकेट पहनने के बावजूद कुछ यात्रियों की डूबने से मौत हो गई।


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याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि पर्यटन विभाग द्वारा पुराने और उम्र पूरी कर चुके क्रूज का संचालन कराया जा रहा था। साथ ही, आईएसआई और बीआईएस मानकों के अनुरूप लाइफ जैकेट की खरीद नहीं की गई। याचिकाकर्ताओं ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मामले की जांच के लिए हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस संजय द्विवेदी की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग गठित किया गया है। आयोग तीन महीने के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा, जिसके आधार पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

युगलपीठ ने यह भी कहा कि हादसे के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर यात्रियों को बचाने वाले मजदूरों को पुरस्कृत करने पर मुख्यमंत्री निर्णय लें। इसके अलावा न्यायिक आयोग को पर्यटन विभाग की आधारभूत संरचना और सुरक्षा व्यवस्थाओं की भी जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।

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